रविवार, 6 सितंबर 2026
सोमवार, 13 जुलाई 2026
गोविंदगढ़, रीवा | खबर संग्राम न्यूज़। गोविंदगढ़ तालाब में मिला अज्ञात युवक का शव, हाथ क्षत-विक्षत मिलने से सनसनी
मंगलवार, 23 जून 2026

भोपाल शहर में खबर संग्राम न्यूज़ कार्यालय का हुआ उद्घाटन
सोमवार, 17 मार्च 2025
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज द्वारा 18 तारीख को रीवा बंद एवं आत्मदाह
मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025
भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ का राष्ट्रीय सम्मेलन प्रयागराज में हुआ संपन्न
मंगलवार, 18 फ़रवरी 2025
महेश प्रसाद सोनी भ्रष्टाचारउन्मूलन संगठन के प्रदेश सचिव बने
रविवार, 16 फ़रवरी 2025
श्रमजीवी पत्रकार परिषद कोठी इकाई की बैठक संम्पन्न
सोमवार, 3 फ़रवरी 2025
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित आजादी के अमर शहीदों को ऐतिहासिक जय स्तंभ पर दी गई श्रद्धांजलि
शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

खबर संग्राम न्यूज़ जिला सतना से संवादाता ऋषिकेश त्रिपाठी की खास रिपोर्ट
शुक्रवार, 16 जुलाई 2021
विद्युत विभाग की लापरवाही को लेकर करेगे
अनिल गर्ग पिन्टु महाराज पुनः शिवसेना सतना के प्रमुख बनाएं
बुधवार, 14 जुलाई 2021
कॉलेज एवं स्कूल की फीस की जाए माफ अभिनव भूदेव पांडे रामपुर बघेलान*
कॉलेज एवं स्कूल की फीस की जाए माफ अभिनव भूदेव पांडे रामपुर बघेलान
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| भूपेंद्र पांडे रामपुर बघेलान |
सतना खबर संग्राम न्यूज़ चैनल नि.प्र करमऊ युवा छात्र नेता अभिनय भूदेव पांडे ने शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि कालेज एवं स्कूल की फीस माफ की जाए क्योंकि कोरोना काल में जहां एक तरफ लोगों का जीना मुश्किल हो गया है वहीं दूसरी तरफ कालेज एवं स्कूल प्रशासन के द्वारा फीस वसूला जा रहा है। वही अभिनय भूदेव पांडे ने बताया की स्कूल एवं कॉलेज के द्वारा ऑनलाइन क्लास चलवाई जा रही है लेकिन आज भी कुछ अभिभावक ऐसे हैं जो अपने बच्चों को स्मार्टफोन नहीं दिला सकते क्योंकि करो ना कॉल में कुछ घरों की स्थिति दयनीय हो गई है। वही श्री पांडे ने कहा कि ऑनलाइन क्लास पर भरपूर बच्चों की पढ़ाई नहीं हो रही है क्योंकि एक तरफ कॉलेज एवं स्कूल की फीस देनी पड़ रही है तो दूसरी तरफ मोबाइल पर रिचार्ज हर महीने करवाने के लिए भी मार झेलनी पड़ रही है।। वही श्री पांडे ने बताया कि की फीस के लिए कालेज एवं स्कूल पर शिक्षकों के द्वारा इतना दबाव बनाया जा रहा है कि अगर फीस जमा नहीं होगी तो परीक्षा फार्म नहीं भरे जाएंगे और ना ही परीक्षा पर बैठने दिया जाएग कुछ कॉलेज ऐसे भी हैं जहां ऑनलाइन क्लास चालू है और बच्चों की फीस जमा नहीं है उन्हें ऑनलाइन क्लास के ग्रुप से हटाया जा रहा है इन कालेजों एवं स्कूलों के शिक्षकों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। श्री पांडे ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से फीस माफ किए जाने की मांग की है
*सतना से जिला ब्यूरो चीफ ऋषिकेश त्रिपाठी की रिपोर्ट*
मंगलवार, 13 जुलाई 2021
बजरंग सेना के कार्यकर्ताओं ने सतना के ट्रांसपोर्ट नगर हनुमान मंदिर में किया हनुमान चालीसा का पाठ
बजरंग सेना के कार्यकर्ताओं ने सतना के ट्रांसपोर्ट नगर हनुमान मंदिर में किया हनुमान चालीसा का पाठ
*सतना खबर संग्राम न्यूज़ चैनल* सामाजिक संगठन बजरंग सेना सतना के नेतृत्व में जिला अध्यक्ष शिवेंद्र मिश्रा के तत्वधान पर हनुमान चालीसा पाठ आयोजन किया गया जिसमें सभी बजरंग सैनिक उपस्थित रहे और हनुमान चालीसा का पाठ कर जय श्री राम नारों का उद्घोष किया गया जिसमें मुख्य रुप से अभिषेक मिश्रा विवेक अग्निहोत्री ऋषिकेश त्रिपाठी रामपुर बघेलान आनंद पांडे पार्थ तिवारी अरुनेंद्र मिश्रा अमर शुक्ला आर्यन निषाद अमित जयदेव विश्वकर्मा सभी लोग उपस्थित रहे।
*सतना से जिला ब्यूरो चीफ ऋषिकेश त्रिपाठी की खास रिपोर्ट*
रविवार, 11 जुलाई 2021

डीजल पेट्रोल और रसोई की बढ़ती महंगाई के विरोध में जबलपुर से सीधी जाते वक्त रामपुर का भ्रमण करते हुए रामपुर बघेलान में ज्ञापन दिया गया*
*डीजल पेट्रोल और रसोई की बढ़ती महंगाई के विरोध में जबलपुर से सीधी जाते वक्त रामपुर का भ्रमण करते हुए रामपुर बघेलान में ज्ञापन दिया गया*
डीजल पेट्रोल और रसोई गैस की बढती महगाई के विरोध में यूवा काँग्रेस द्वारा जबलपुर से सीधी के लिए साईकिल रैली निकाली गई इस आयोजित साईकिल रैली में आज नेमुआँ मोड़ में नगर अध्यक्ष नारेन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों काँग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ यूवा काँग्रेस (साईकिल रैली) का भव्य स्वागत किया गया इसके पश्चात रैली में सम्मिलित होकर रामपुर बाघेलान मेन मार्केट होकर तहसील रामपुर बाघेलान में ज्ञापन सौंपा गया
*सतना से जिला ब्यूरो चीफ ऋषिकेश त्रिपाठी की खास रिपोर्ट

कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई के साथ हो रहा क्रूर खिलवाड़ :
गुरुवार, 8 जुलाई 2021

मंदिरोंथाना अतरैला की कार्य वाही मंदिरों मे घंटा चोरी करने वाले गिरोह का किया गया पर्दाफाश।
सोमवार, 3 मई 2021
लाक डाउन से नहीं लगता महंगाई से डर लगता है । खबर संग्राम न्यूज चैनल रीवा
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| खबर संग्राम न्यूज चैनल रीवा |
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लाक डाउन से नहीं लगता महंगाई से डर लगता है साहब, मनिकवार अनिल गुप्ता, कोरोना वायरस से आज पूरा देश परेशान हैं वहीं इससे बचने के लिए लगने वाले लाक डाउन से अब गरीब, व्यापारी, मध्यमवर्गीय परिवारों में भारी डर पैदा हो गया है, कहां भी अब बार बार लगने वाले लाक डाउन से नहीं डरते अगर डरते हैं तो बेतहाशा महंगाई मनमानी यात्रा किराया, भाड़ा, व पुलिस के कमाई का एक बढ़िया जरिया भी बन गया है जहां आने जाने वालों को परेशान किया जा रहा है वहीं बेवजह चलानी कारवाई करने से पीछे नहीं हैं, इस चलानी कारवाई से सरकार अब बेतन की भी जुगाड में है, उन ब्यापारियों को इस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिनका निवास पर ही दुकान है बाहर निकलो तो दुकान खुली और चलान अंदर रहोगे तो लोग पूछते हैं कि भाई है कि नहीं, ऐसे में आखिर घर दुकानदार कहां जाएं, लाक डाउन से शादियां भी हुई और रद् भी बच्चों में कोरोना का डर पढ़ाई खत्म अब तो निजी स्कूलों के शिक्षकों को बेरोजगारी का ऐसा माहौल निर्मित हो गया है कि इधर उधर पकौड़े लगाने की तलाश भी कर लिया तो लाक डाउन का पीछा वहां भी नहीं छूटा, ऐसे में अगर परेशानी से निजात मिला है तो सरकारी अधिकारी कर्मचारी को जहां काम अधूरा वेतन पूरा, लोगों ने कहा भी ये सरकारी दामाद है इन्हें कोई भी कहीं दिक्कत नहीं होगी और कोरोना से मौत होती है तो पुनः परिवार को नौकरी और मुआवजा भी जबकि इस महगाई से परेशान छोटा ब्यापारी अब भिखारी सा नजर आता है और महंगाई मनमानी है, अगर इसी तरह लाक डाउन होता रहा तो सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते वाला अब जिंदगी और मौत के बीच भटकता नजर आ रहा है अब कोरोना वायरस से होने वाली मौतें यहां कम होगी परेशानी समस्याओं, भूखे प्यासे रहकर ही होंगी, और पुलिस ब्यापारियों में भी संबंध काफी ख़राब हो रहे हैं जो एक अलग से ही समस्या दिखाई दे रहा है गांवों से मदद करने वाले समाजसेवी भी पलायन कर गए हैं फोटो..।
शनिवार, 27 मार्च 2021

कलेक्टर महोदय से विनम्र निवेदन है कि हमारी प्रार्थना स्वीकार करें।khabar sangram news rewa.
Rewa कलेक्टर महोदय = गली-चौराहों में सरे आम धूनी रमाने वाले गजेड़ी प्रशासन को नजर क्यों नही आते? प्रशासन द्वारा पोषित शराब क्या नशें की श्रेणी में नहीं आती? मान्यवर वैध और अवैध नशे की श्रेणी पर विस्तार से प्रकाश डालने की कृपा कीजिए, प्लीज//😊आपका प्रयास सराहनीय है परन्तु नेताओं की तरह के भाषणों से कुछ होने वाला नहीं।जिस दिन रीवा जिला का नशा नाश होगा उस दिन का मुझे बेसब्री से इंतजार है।अधिकांश अवैध कार्यों की जानकारी आपकी प्यारी पुलिस और राजस्व को रहती है।नाक के नीचे ही परिवहन की अवैध वसूली और अपराधियों को संरक्षण आपकी पुलिस ही तो देती है।एम पी से बाहर यू पी में जाइये गंगा स्नान को,हर चौराहे में पुलिस हर वक्त तैनात रहती है और आपकी पुलिस चौराहों से नदारद और वसूली केंद्रों में हर समय उपलब्ध रहती है।आपके साथ ही पूरी जनता को पुलिस की कार्यप्रणाली का पता है।सभी लोग बस रामभरोसे जिंदा हैं।सफाई व्यवस्था को ही ले लीजिए,रीवा जैसा वायु-धूल प्रदूषण पूरी दुनिया में नही है।रोड का कार्य इतना धीमा है कि धूल खाते-खाते पुश्त बीत जाती है और एक फ्लाईओवर के निर्माण में पूरी सदी गुजर जाती है। क्या मैं सराहना करूं आपके प्रशासन की?राजस्व में आ जाइये तो एक पटवारी इतना कमाता है कि उसे अपने तृतीय श्रेणी के कर्मचारी होने का रत्ती भर गम नही होता।आलीशान कोठी और असीम अवैध दौलत के ढेर में बैठा ये पटवारी नामक जंतु अपने आपको विभाग प्रमुख यानी आप से भी ऊपर अपने को मानकर चलता है।कोई भी ऐसा सक्रिय विभाग आपके पास नहीं है जो इन राजस्व कर्मचारियों पटवारी,आर आई,तहसीलदारों की आय से अधिक संपत्ति का आंकलन कर सके।राम राज्य की कोरी परिकल्पना नही वरन राम राज्य की दिशा में बढ़ने का साहस पैदा कीजिये,महोदय।एक सामान्य आदमी दिन भर की दिहाड़ी करके भविष्य के सपने नहीं देख सकता और उस पर भी आपकी सरकारी मशीनरी शोषण करती रहती है।आपकी पुलिस लोगों का अपमान करती है ,कोई भी सीधा,सच्चा इंसान रिपोर्ट लिखवाने थाने जाने से घबराता है।आपके ये लठैत कब किस पर अकारण टूट पड़ें ,सबको भय रहता है।इस आधार पर हम भयमुक्त समाज की परिकल्पना कैसे कर सकते हैं?जरा ज्ञान दीजियेगा, प्लीज।
शुक्रवार, 26 मार्च 2021

रीवा जिलेमें आए दिन भारी भारी दुर्घटना में सैकड़ों लोग रोजाना मर रहे हैं सरकार किसी तरह से ध्यान दे रही है ..
REWA- रीवा जिले की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई हुई है रोड में आए दिन भारी भारी दुर्घटना में सैकड़ों लोग रोजाना मर रहे हैं गांव के हाल ग्रामीण जनों को ना तो किसी तरह के ग्राम पंचायतों से किसी तरह के फायदे दिलाया जा रहे हैं और ना ही सरकार किसी तरह से ध्यान दे रही है हर पंचायतों में पानी के हैंडपंपों पंप हाउसों में प्राइवेट लोगों के कब्जे हैं और उन शासकीय हैंडपंपों मोटरों को प्राइवेट दबंग लोग अपने अपने घर में 5 स्टार्टर रखकर अपने इस्तेमाल में ले रहे हैं हर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं भी उसी तरह चरमराई हुई है ना तो कभी अस्पताल खुलती है ना ही डॉक्टर या कोई चपरासी अपनी ड्यूटी में पहुंचते हैं यदि कभी कहार महीने भर में 1 का 2 दिन कहीं पहुंचते भी हैं रजिस्टर में हाजिरी लगा कर चले जाते हैं यदि देखा जाए तो वहां अस्पतालों की बिल्डिंगों में अंदर जितनी भी दवाइयां रहती है ना जाने कहां गायब हो जाती हैं यदि कभी डॉक्टरों से मुलाकात किसी की हो जाए तो उसको बता दिया जाता है कि यहां तो किसी तरह की दवाइयां ही उपलब्ध नहीं कराई जाती और ना ही स्वास्थ्य महकमा कभी कोई ध्यान ही देता है वैसे तो देखा जाए तो भ्रष्टाचार कभी भी लगाम नहीं लगाया जा सकता लेकिन यदि किसी तरह से भी छोटी मोटी बातों पर भी ध्यान देकर शिकायतों को ध्यान देकर उनकी जांच पड़ताल कराई जाए या किसी की शिकायत होने पर उसकी बातों को माना जा समझा जाए तो कर्मचारियों में भय बन सकता है थोड़ी बहुत व्यवस्थाएं शुद्रढ हो सकती है नहीं तो ऐसे तो ना ही भ्रष्टाचार रुक पाएगा और ना ही कोई जन सुविधाएं किसी भी व्यक्ति को चाहे वह गामों में रहने वाला हो या शहर में किसी को प्राप्त नहीं कराई जा सकती सरकार के सभी जन सुविधाओं को कागजों में रिकॉर्ड तैयार किए जाते हैं उसके बाद सूचनाएं लोगों के बीच में पहुंचा दी जाती है कि इस तरह की सुविधाएं आप सभी को प्राप्त होगी लेकिन वह मात्र दिखावे एवं कहने मात्र के लिए सुविधाएं होती हैं नीचे स्तर पर कभी भी किसी तरह से भी देखा जाए तो यदि सौ व्यक्तियों में एक व्यक्ति को भी किसी तरह की सुविधाएं प्राप्त नहीं हो पाती झूठ पर पूरे शासन प्रशासन एवं राजनीति में बैठे ऊंचे पदों पर मंत्री विधायक तक झूठे वादों और झूठे कार्यों में टिके होते हैं जनता करे तो करे क्या जहां शिकायत करनी है वहीं से भ्रष्टाचार शुरू होता है ना तो जनता की कोई बात सुनने वाला और ना उसकी बात समझने वाला चाहे भोली-भाली जनता कहीं भी शिकायत करते घूमती रहे या इधर-उधर सर पटकती रहेअंत में उसे एक ही रास्ता मिलता है आत्महत्या का जो बड़े ही आसानी से लोग यह रास्ता चुन लेते हैं क्या करें उनकी भी मजबूरी है कैसे चलाएं अपना घर परिवार घर परिवार जिसको चलाना होता है अगर उसके पास कोई शासकीय नौकरीया कोई प्राइवेट व्यापार या प्राइवेट नौकरी ही ना हो वह बेचारा बेरोजगार घूमता हो तो उसका घर परिवार कैसे चल सकता है रही किसी तरह परिवार चलाते रहने की तो यदि किसी से सहयोग ले लेकर वह अपने बाल बच्चों का गुजारा भी करें पेट भी पाले लेकिन उस तरह से भी ना तो किसी ग्राम पंचायतों में किसी को कुछ भी सहयोग नहीं प्राप्त होता और ना ही सरकारों के द्वारा किसी तरह का सहयोग वैसे तो माना जाए तो जिला कलेक्टर जिला दंडाधिकारी अपने जिले का मुखिया होता है वह चाहे तो जनता को नेताओं के चक्कर न लगवा कर खुद सक्षम अधिकारी होता है कि सभी ग्रामीण जनों की बातों को बीच-बीच ग्रामीण चौपाल बनाकर सुने उनकी दिक्कतों को सुनें एवं थोड़ा बहुत तो सहयोग कर सकता है और यदि जिला दंडाधिकारी चाहे तो पूरी की पूरी जिले की व्यवस्थाएं शुद्रढ और मजबूत हो सकती है सभी की दिक्कतें दूर हो सकती है परंतु ऐसा कहीं भी किसी जिले में नहीं देखा जाता क्योंकि हर जिले का मुखिया हर उन बड़े नेताओं के गुलाम होते हैं जो कि उनको बंधन में डाले होते हैं उन्हीं के इशारे पर चलना होता है वैसे तो जिला दंडाधिकारी एक सक्षम अधिकारी एवं अपने जिले का मुखिया होता है वह किसी के दबाव में या अंदर में कार्य करने वाला नहीं होता है लेकिन समय बदल चुका है लोगों को अपनी नौकरी बचानी है और सत्य का साथ देने वालों का ना जाने क्या हाल होता है हर एक व्यक्ति जानता है इसलिए लोगों को झूठा सहारा लेकर वाहवाही लूटने के लिए अपनी नौकरी बचाने के लिए बड़े उद्योगपतियों और नेताओं के चंगुल में फंसे रहना पड़ता उनकी हाजिरी चाकरी लगानी पड़ती है अगर यही हाल रहा तो बहुत दूर नहीं हो दिन जबकि अग्रेज जब भारत में कब्जा किए हुए थे लेकिन अब तो काले अंग्रेज भारत के ही भारत में कब्जा कर उद्योगपति लोग गरीबों को मरने पर मजबूर करते रहेंगे। अगर आप अपने हित की बात को बहुत दूर तक सोचे समझे तो मेरे द्वारा लिखी गई बातों को समझने की कोशिश करेंएवं किसी भी चुनाव में वोट देने के लिए लाइन में लगने अपना समय बर्बाद करने के समय यह सब कुछ सोचे कि हम क्या कर रहे हैं इनको 55 दास 10 वर्ष के लिए अधिकार दिला देते हैं यह अधिकार लेकर अपने हितों के लिए दौड़ना चालू कर देते हैं और आप सब फिर वही मेहनत मजदूरी में उसी तरह परेशानियों में जुटे रहते हैं अगर वोट से इन्हें बड़े पद पर ही बैठ आना है तो बहुत कुछ सोच कर ही वोट दें अन्यथा हर एक चुनाव में वोट का बहिष्कार करें क्योंकि ना तो यह राजनेता आपके किसी काम आते हैं और ना ही ऊंचे पदों पर बैठे आला अधिकारी आपको तो बस वही जिंदगी भर उसी तरह मेहनत मजदूरी करनी होती है नियमों के पीछे पीछे दौड़ना होता है और जिंदगी बितानी होती है अगर देखा जाए तो ना तो आप को वोट देने के बाद किसी तरह की सुविधाएं प्राप्त होती हैं और ना ही कुछ आपके परिवार को जो भी कुछ मिलता है तो उन्हें ऊंचे पदों पर जिनको आप के वोटरों द्वारा बैठाया जाता है उनके घर परिवार नाथ रिश्तेदारों को हर तरह की सुख सुविधाएं प्राप्त होती हैं और हर तरह से नौकरी चाकरी पैसा रूपया सुख सुविधाएं प्राप्त कराई जाती है और आप सब इनके बंधन में हमेशा बने रहते हैं इन सभी आपके द्वारा ऊंचे पदों पर बैठाए गए नेताओं की तनख्वाह हर तरह से इनको बिजली पानी में छूट ऐसी गाड़ियों में घूमने की सुविधाएं उसी तरह हर कर्मचारी को एक-एक लाख डेढ़ डेढ़ लाख हर महीने तनख्वाह ऊपरी कमाई का जरिया घोष जिसके द्वारा यह अपने जीवन और घर परिवार को एस कर आते हैं लेकिन आपको क्या मिलता है कम से कम अपने अपने घर परिवार वालों के लिए कभी तो सोचिए नहीं तो सबसे अच्छा समय वही था अंग्रेजों का कम से कम मेहनत मजदूरी करते थे और उनकी गुलामी करते थे तो दो वक्त की रोटी ही नसीब हो जाती थी अन्यथा यह बड़े ऊंचे पदों पर बैठे लोग एवं जनता द्वारा चुनकर गए पड़े पदों पर नेताओं के चंगुल में फंसे रहेंगे तो आने वाले समय में आपके बच्चे भूखे मरेंगे एवं आत्महत्या करते रहेंगे इस लिखे हुए बातों पर गौर करें इसे ध्यान से पढ़ें एवं सत्यता क्या है अपने हिसाब से लिख भेजे संपर्क सूत्र 8982 8798 55 व्हाट्सएप नंबर WhatsApp chat here


